प्रदूषण के चलते हेमरेज और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ रहे हैं मामले

मुंबई: ब्रेन हेमरेज और ब्रेन स्ट्रोक मुंबईकरों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, महानगर में रोजाना औसतन 7 लोग हेमरेज और लगभग 6 लोगों ने स्ट्रोक के चलते अपनी जान गंवाई है। न्यूरो विशेषज्ञों ने मुंबईकरों को अपने दिल के साथ-साथ दिमाग का भी ख्याल रखने की सलाह दी है। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग में दायर की गई आरटीआई याचिका के अनुसार वर्ष 2022 में ब्रेन हेमरेज के कारण 2573 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि पिछले एक वर्ष में ब्रेन स्ट्रोक आने के चलते 2012 मुंबईकरों को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी है।
ये आंकड़े 2021 की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक हैं। जेजे अस्पताल के इंटरवेंशनल स्ट्रोक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शशांक नागेंद्र ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक आने की वजह है सुस्त जीवनशैली, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल से संबंधित बीमारियां। स्ट्रोक में दिमाग की वेसल में क्लॉट हो जाता है, जिसके चलते ब्लड की सप्लाई दिमाग के अन्य हिस्से में नहीं पहुंचती है। इससे हाथ, पैर, चेहरे पर लकवा मार देता है। गोल्डन ऑवर्स में यदि व्यक्ति आता है, तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
नायर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. आदिल छागला ने बताया कि ब्रेन हेमरेज के लिए वायु प्रदूषण भी एक कारण है। वायुमंडल में मौजूद डस्ट हमारे शरीर में जा रहे हैं। ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है और ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलता है। ऐसे में ब्रेन से ऑक्सीजन के लिए सिग्नल जाता है और बीपी बढ़ता है। जब बीपी हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो रक्त की आपूर्ति करने वाली नस फट जाती है और रक्तस्राव होने लगता है। पहले ब्रेन हेमरेज बुजुर्गों में होता था, लेकिन अब 30, 40 और 50 की उम्र के लोगों में हेमरेज हो रहा है। शहरीकरण, हाइपरटेंशन, एन्यूरिज्म, स्ट्रेस ब्रेन हेमरेज के कारण हैं।